हर क्यारी में पद चिन्ह तुम्हारी देखे है,,,,,,,,,,,,,,, हर डाली
में मुस्कान तुम्हारी पायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,. हर काट॓ में
दुःख - दर्द किसी का
कसका है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, हर
शबनम में जीवन
की प्यास जगायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मै कैसे इनकी
मोहाकता से मुह – मोडूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं
कैसे जीवन के सौ-सौ
धध॓ छोडूँ
,,,,,,,,,,,,,,
दोनों
को साथ लिये चलना क्या संभव
है ? .............. तन का
मन का पवन नाता कैसे
तोडूँ ?
इस
नये
सवेरे की लाली को
देखे तो ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
इसकी
अपनी कितनी पह्चान
पुरानी है
||||||| Monday, 20 April 2015
हर क्यारी में पद चिन्ह तुम्हारी देखे है,,,,,,,,,,,,,,, हर डाली
में मुस्कान तुम्हारी पायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,. हर काट॓ में
दुःख - दर्द किसी का
कसका है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, हर
शबनम में जीवन
की प्यास जगायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मै कैसे इनकी
मोहाकता से मुह – मोडूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं
कैसे जीवन के सौ-सौ
धध॓ छोडूँ
,,,,,,,,,,,,,,
दोनों
को साथ लिये चलना क्या संभव
है ? .............. तन का
मन का पवन नाता कैसे
तोडूँ ?
इस
नये
सवेरे की लाली को
देखे तो ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
इसकी
अपनी कितनी पह्चान
पुरानी है
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