हर क्यारी में पद चिन्ह तुम्हारी देखे है,,,,,,,,,,,,,,, हर डाली
में मुस्कान तुम्हारी पायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,. हर काट॓ में
दुःख - दर्द किसी का
कसका है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, हर
शबनम में जीवन
की प्यास जगायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मै कैसे इनकी
मोहाकता से मुह – मोडूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं
कैसे जीवन के सौ-सौ
धध॓ छोडूँ
,,,,,,,,,,,,,,
दोनों
को साथ लिये चलना क्या संभव
है ? .............. तन का
मन का पवन नाता कैसे
तोडूँ ?
इस
नये
सवेरे की लाली को
देखे तो ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
इसकी
अपनी कितनी पह्चान
पुरानी है
||||||| Monday, 20 April 2015
हर क्यारी में पद चिन्ह तुम्हारी देखे है,,,,,,,,,,,,,,, हर डाली
में मुस्कान तुम्हारी पायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,. हर काट॓ में
दुःख - दर्द किसी का
कसका है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, हर
शबनम में जीवन
की प्यास जगायी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मै कैसे इनकी
मोहाकता से मुह – मोडूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं
कैसे जीवन के सौ-सौ
धध॓ छोडूँ
,,,,,,,,,,,,,,
दोनों
को साथ लिये चलना क्या संभव
है ? .............. तन का
मन का पवन नाता कैसे
तोडूँ ?
इस
नये
सवेरे की लाली को
देखे तो ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
इसकी
अपनी कितनी पह्चान
पुरानी है
|||||||
ये मुस्किलो से कह दो मेरा खुदा बडा है ये मत कहो खुदा से मेरी मुस्किले बडी है |
ये
मुस्किलो से कह दो मेरा खुदा बडा
है ये मुस्किलो से कह
दो मेरा खुदा बडा
है
आती है आंधिया तो कर उनका खेर मक्दम ,,,,,,,,,आती है आंधिया तो कर उनका खेर मक्दम
तुफा से तो ही लड़ने खुदा ने तुझे जडा है ,,,,,,,,
ये मत कहो खुदा से मेरी मुस्किले बढ़ी है | ये
मत कहो खुदा से मेरी मुस्किले बढ़ी है | ये मुस्किलो से कह दो
मेरा खुदा बडा है
अग्नि में तप्के सोना है और भी निखर्ता ,,,,,, दुर्गम को पार करके हिमलया कोई चढ़ा है ,,,,,,, लाए
गी रंग मह्नत अखिर तुम्हारी एक दिन,,,,,,लाए
गी रंग मह्नत अखिर तुम्हारी एक दिन होगा विशाल गिर्वर वो बीज जो पढ़ा है | ये मत कहो खुदा से मेरी मुस्किले बढ़ी है | ये मत कहो खुदा से मेरी
मुस्किले बढ़ी है | ये
मुस्किलो से कह दो मेरा खुदॎ बडा
है |
“ ओ स्वाइन फ्लू कहा से आये हो और कहॅा को जाओगे ’’
ये अल्फाज
हमने ओटो चालक़ से सुना ,जब ह्म सुबह घर से विशवविघालय जा रही थी . यह वॉहकिया इस प्राकार घटी कि
जब ओटो चालक़ ने चारबाग सटेशन पे ओटो रोकी और एक व्यक्ति मास्क
लगा के खड़ा
था उस दौरान ओटो चालक़ ने यह प्रशन
किया उस
व्यक्ति से ''ओ स्वाइन फ्लू कहा से अये हो और कहा को
जाओगे’’’
ऐसा सुन क॓ लगा के लोग जागरूक है। अब हम आप सभी को बताना चहुंगी कि ये
स्वाइन फ्लू होता क्या है \ स्वाइन फ्लू सुआरो
को सदी ,जुखाम आदि को फ्लू
कहते है क्योंकि फ्लू एक संक्रमण रोग है इसलिए
संक्रमित सुआरो के संपर्क में रहने वाले मनुषयो को भी होने कि समभावना रहती है.इस फ्लू के लिए उततरदायी विषाणू चार प्रकार के होते
है जिनमें H1N1 अत्यंत घाटक होता है मनुषयो में इस विषाणू के प्रति रोग
प्रतिरोधक धमता बहुत कम होती है इसीलिए यह मनुषयो मे प्राण घातक होती है जब कोई पशू या व्यक्ति इस रोग
से पिड़ित छिकता है तो वह विषाणू वायुमंडल में
उत्सर्जित कर देते है.ये विषाणू वायुमंडल में ह्वा
के माधय्म से फैलता है.यह वातावरण में बदलती नमी से और तेजी से फैलता है । लछण—
सर्दी ‚जुखाम ‚गले में ददॆ ‚बुखार ‚सिर ददॆ ‚चककर आना ‚कब्ज ‚भूख न लगना ‚नाक बहना आदी .इस रोग में रोगी में
अत्यधिक ठंड लग सकती है .सास लेने में दिक्क्त
के सथ उलटि द्स्त कि शिकयत भी रह सकती है.अगर आपको ये सारे लछण 2 या 3 दिन तक ऐसे ही दिखाई
दे तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिऐ । इस समय अपको संकृमित व्यक्ति से दुर
रह्ना है और धुप में कम निकलना चहिऐ और सबुन से हाथ बार-बार धोना चहिये ।सम्भावित संक्रामण को साफ कर लेना चहिये ।मोबाइल ‚कीबोर्ड ‚लप्तोप आदि साफ करना चहिये संकृमित व्यक्ति को चहिये
कि छीकते समय साफ रुमाल का प्रयोग करना चहिये
आस-पास सफाई रखे ‚कम से कम
लोगो से मिले ‚अपनी जरुरत कि चिजे अलग से रखे ‚खुब
पानी पिये धुमृपान न करे .ठीक होने के बाद भी इन सब चिजो का
ख्याल रखे .
इन सब चिजो से स्वाइन फ्लू से बचा जा
सकता है.
स्वस्थ्य मंऋलय ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए भरपुर इंतजाम किऐ है ‚
जरुरत सिर्फ़ ये है कि स्वाइन फ्लू के लछण दिखते ही मरीज का इलाज शुरू करवा दिया जाए
।
स्वाइन
फ्लू से दरने कि नही बल्कि जागरूक रहने कि जरुरत है॥
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