Saturday, 21 July 2018

जब प्यार नही तो भुला क्यों नई देते

जब प्यार नही तो भुला क्यों नई देते।   

  खत किस लिए रखे हैं जला क्यों नही देते।   
   
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम       
                     मैं हर्फ़-ए-गलत हु तो मिटा क्यों नई देते  ।
    
लिलाहः शब-ओ-रोज़ की उलझन से निकालो

तुम मेरे नही हो तो बता क्यों नही देते
रह रह के न तड़पाओ ऐ बे-दर्द मसीहा

हाथो से मुझे जहर पिला क्यों नही देते

जब उस की वफाओ पे यकी तूम को नही है

                 हसरत को  निगाहों से गिरा क्यों नही देते।।